मुल पूर्खा : रणमा खाँ - एक जानकारी
थौर जाईत — नेपालके आदिवासी
आदिकाल से थौर जाईत नेपाल अधिकारज्य के पूर्वी सिमाना मेची से ल्याके पश्चिमी सिमाना महाकाली तैक तराई क्षेत्रमे बसोबास करैत आवैछै । यै क्षेत्रमे शताब्दीऔं पिहने बोनेबोन जङ्गले जङ्गल रहै । यै बोन जङ्गल मे पिहने जे कोय जाई तकरा मलेरिया रोग लाइग जाई छेलै । तै द्वारे यै क्षेत्रके बोन जङ्गल मे कोई बसोबास नै करेसकै छेलै मगर वोहन मलेरिया लागैवला हैतोमे थौर जाईत सब बसोबास करैछेलै कियाके त ओइसबके मलेरिया नै लगै छेलै यै वातके जाँच भेल छै या साविंतो भेल छै कि थौर जाईतके लहुमे मलेरियासे लरैके क्षमता छै । यहै द्वारे औरो जाईत सब यै बोन जङ्गलमे मलेरियाके लागैके डरसे बसोबास नैकरेसकै छेलै मात्र थौर सब यै क्षेत्रमे आदीकाले बसोबास करै छेलै या आईतैक यै क्षेत्रके २२ जिल्लामे थौर जाईतके बसोबास जैहनाके तैहना छै । यिह द्वारे थौर सब नेपालके आदिवसीके रुपमे जानल जाइछै । तिहने थौर भषा, संस्कृति, रहनसहन, समाजिक व्यवहार, खानपिन, शारीरिक बनाबट, पिहरनसब दोसर जाइत से फरक भेलाके कारण थौर नेपालके आदिवासी मानल गेलछै ।
रणमा खाँ — गैयाँ बबा
थौर जाईत अन्तर्गत बहुत किसिमके आपन आपन पहैत या थाकवशं छै । प्रस्तुत बंशावलीमे 'रणमा खाँ' बंशके बंशावली उल्लेख क्याल गेल छै । अग्रज रणमा खाँ के बुढ पुरान सबके कहब अनुसार रणमा खाँ के जनम अखुनका सप्तरी जिल्लाके अकवरपुर भगवतपुर गाममे भेल रहै । तै समयमे थौर सबके किरब किरब सैब घरमे बहुत संख्यामे गाय, भैस रहै । उ सब गाय भैस चरबैले बोनजङ्गलमे, टप्पुमे जाइतरहै । जै ठाम अस्थायी बसोबास क्याके बहुत संख्यामे गाय भैस चरावै या राखै जकरा 'बथान' कहैछेलै । 'रणमा खाँ' या ओकर यार(वगैरीया) 'जसमत खाँ' दुनु गोरे संगे संग गाय भैस चरावैत रहै । यी दुनु गोरेके बथान अखुनका सप्तरी जिल्लाके बैरयाही (शम्भूनाथ न.पा. वार्ड नं. ८) गाम क्षेत्रमे रहै । तखुन त घनघोर) बोन जङ्गल रहै, जै मे बाघ, भौल, गोडी जखा हिंसक जङ्गली जानवरसब बहौत संख्यामे रहै । रणमा खाँ बहौत बलगार साहसी या निडर मरद छेलै तहै से ओहेन बोन जङ्गलमे आपन यार संगे गाय भैस बथान राईखके चरावैत रहै । सब दिन गाय भैस चरावैके कारणसे रणमा खाँ के सखासन्तान सब ओकरा 'गैयाँ बबा' कहैछै ।
बथान के क्रममे एक दिन गैयाँ बबा ओई जङ्गलमे हन्यागेलै अर्थात उ विल्यागेलै ओकर गाय भैस अनेरे भोइर दिन चैरके बथानमे अलै । ओकर यार जसमत खाँ ओकरा ताके लागलै, सैबके खबर कैल्कै । महादेव(रणमा खाँ बबाके बाबु)/सहादेव(रणमा खाँ बबाके कका) संगे सबकोय मिलके बैरके घनघोर बोनमे ढावे कुशे, काँटे कुशे, फारेपाते जते तैक सकलकै ओतै तैक ताकलकै मगर उ कतौ नै भेटलै । अन्तमे गैयाँ बबाके बरका लाठी, खरम, जमा, गम्छा, चिमटा, बटुवा, चिलम खैनी एकटा गाछी तरमे भेटलै लेकिन बबा नै भेटलै । ओकर गाय भैस सोहो धियापुता सब आपन आपन घर ल्या गेलै । बबा बिलेलाके किछेक दिनके बादमे बोनजंगल जायवला बाट बटोहीसब, ओइ कातकुतके और और लोक सब बबाके लाठी खरम भेटलाहा गाछीके कातकुतमे गुँहमुत, धिनाह करे लाग्लै तहै समयमे बैरयाही जङ्गल क्षेत्रमे दिने दिने बगहौर(बाघके प्रकोप) हेवे लाग्लै । बघहौरमे सब दिन ककरो ने ककरो गाय, भैस, बकसी बाघ ख्याजाय/ल्याजाय, ओइ कातकुतके लोक घर से निकले नै सकै, बहौत बरका प्रकोप भ्यागेलै । ताब ओहै गामके लोक रणमा खाँ बबाके सुमरण कैलकै तब बबा देवताके रुपमे ओकर शिरमे 'स्याहा' भेलै या बगहौरके कारण या निदान बताइलकै संगे संग उ आपन पुजा माँगलकै या ताब लोक सब पुजा देलकै या वगहौर हैंट गेलै । तहै दिनसे बैरियाही क्षेत्रके लोक सब ओकरा बिरसे बिरस पुजा देवे लागलै । ओइ दिन से आई तैक वई कातकुतमे ककरो घरमे दु:ख विपैत परैछै या कोनो गाममे, यै गलगि वगहौर, हैजा, फौती नै हेवे से कैहके रणमा खाँ बबाके सुमरन करैछै या दु:ख विपैतके निदान करै छै ।
रणमा खाँ बबाके गहवर थान
मुल पुखाँ रणमा खाँ बबाके गहवर थान वर्तमान विरपुर गामके आमके फुलवाइरमे बैरियाही टोलके डिहवार थानके नाम से स्थापित छेलै या बैरयाही टोल बला रणमा खाँ के सखा-सन्तान सब वई थानमे नियमित पुजा पाठ करैछै । लोक सब आपन आपन सकरता अनुसार बैल भोग दैछै । रणमा खाँ बबाके नामसे अखौनतोघैर गाय भैंसके दुधके पहौनका ढार ओहै थानमे दैछै । हाल वर्तमानमे रणमा खाँके थानमे रणमा खाँ बंशाके सम्पूर्ण खन्दान सब मिल जुइलके धुमधामके से बैशाष १ गते सिरवा पाबैनके दिन पुजा आजा करैछै, बैल भोग दैछै, पान पर्साद ग्रहण करैछै या बबाके आशिर्वाद लैछै ।

रणमा खाँ बबाके गहवर थान
रणमा खाँ के बंशज
रणमा खाँ के बंशज धियापुता सब सप्तरी जिल्लाके डङ्गराही, कचनदाहा, बेङ्री, प्रमाणपुर, लक्षणपट्टी, कनकपुर, बलुवा, फुलहरा, कुशाहा, बकसाहा मे तैहने सिरहा जिल्लाके सिसौनी, बर्छबारमे, मोरङ सुनसरी जिल्लाके मधेशाभौरा, बकलौरी, लालपुरभोरा या उदयपुर जिल्लाके बेलहा गाम सबमे बसोबास करैछै ।
अन्तमे रणमा खाँ बंशके बारेमे यतेक बात राखैत यी बंश औरो फलेफुले तकर कामना करैची । यै बंशके बारेमे और ककरौ कोनो जानकारी छै त वोहौके स्वागत छै, यै मे राखल जतै ।
देव नारायण चौधरी (डङ्गराही, सप्तरी)
मुल समिति अध्यक्ष