रनमा खाँ बंशावली
Ranmakha Banshavali
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थौर जाईत — नेपालके आदिवासी
आदिकाल से थौर जाईत नेपाल अधिकारज्यके पूर्वी सिमाना मेची से ल्याके पश्चिमी सिमाना महाकाली तैक तराई क्षेत्रमे बसोबास करैत आवैछै। मलेरियासे लरैके क्षमता भेलाके कारण बोन जङ्गलमे बसोबास करेसकै छेलै जहाँ दोसर जाईत नै बसेसकै छेलै — यिह द्वारे थौर सब नेपालके आदिवासीके रुपमे जानल जाइछै।
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रनमा खाँ भजन
रणमा खाँ बबाके घरमे देर छै, अन्धेर नै छै यौ -२ सचे मनसे ध्यान करु विश्वास राखु यौ-२ रणमा खाँ बबाके राखियौ सबकोइ ध्यान घरघरमे हेतै सबके कल्याण-२
रणमा खाँ बबा सबकुछ जानै छै-२ ओकरे किरपा से सब काज करै छै-२ ओकरमे राखियौ सबकोइ ध्यान घरघरमे हेतै सबके कल्याण-२
रणमा खाँ बबाके धुप आरती किरयौ-२ सब कोइ ओकरै परणाम किरयौ-२ सबकोइ एिलयै बबाके स्थान घर घरमे हेतै सबके कल्याण-२ रणमा खाँ बबा रिखयौ सबकाई ध्यान ।
भजन रचनाकार: सबुर लाल चौधरी दास बर्छबार, सिरहा
रनमा खाँ गित
एक दिन चराव गेला गईया, बगरीया लेके ।
महादेव सहादेव जनम लेला यी घरतीमे अपन संतान के खातीर वहीमे से जनम लेला रनमा खाँ ।
— रचनाकार: ओम प्रकाश चौधरी, बर्छबार, सिरहा